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VV Bachpan · बच्चों की कहानियाँ · लगन: रुको मत

खरगोश और कछुआ की कहानी

पढ़ने में लगभग 3 मिनट · 3 से 8 साल · सोने से पहले के लिए

छोटे में कहानी

  1. तेज़ दौड़ने वाले खरगोश ने धीमे कछुए को खेल-खेल में दौड़ के लिए बुलाया।
  2. आगे निकलकर खरगोश पेड़ की छाँव में सो गया, और कछुआ बिना रुके चलता रहा।
  3. कछुआ पहले पहुँचा। खरगोश ने सीखा कि रुके बिना चलने वाला भी मंज़िल पा लेता है, और दोनों दोस्त बन गए।

पूरी कहानी

एक बार की बात है, एक हरे-भरे जंगल में एक नन्हा खरगोश रहता था। उसके कान लंबे-लंबे थे। उसकी आँखें चमकती थीं जैसे ओस की बूँदें। वह बहुत तेज़ दौड़ता था। उसी जंगल में एक प्यारा सा कछुआ भी रहता था। कछुए की पीठ पर एक सुंदर घर था। वह बहुत धीरे-धीरे चलता था, पर मुस्कुराता हमेशा रहता था।

एक शांत सुबह खरगोश नदी के किनारे टहल रहा था। वहाँ उसे कछुआ मिला। खरगोश ने प्यार से कहा, कछुए भाई, तुम इतने धीरे क्यों चलते हो। कछुए ने हँसकर कहा, मैं धीरे चलता हूँ, पर रुकता कभी नहीं हूँ।

खरगोश ने खेल-खेल में कहा, चलो हम दोनों एक छोटी सी दौड़ लगाते हैं। वो सामने वाला बड़ा पेड़ देखो। जो पहले वहाँ पहुँचेगा, वही जीतेगा। कछुआ धीरे से बोला, ठीक है भैया, मैं कोशिश करूँगा।

जंगल के सारे जानवर इकट्ठा हो गए। चिड़िया ने अपने पंख फैलाए। हिरण ने सिर हिलाया। दौड़ शुरू हुई। खरगोश फुर्र से आगे निकल गया। कछुआ धीरे-धीरे, कदम दर कदम, आगे बढ़ने लगा।

कुछ देर बाद खरगोश ने पीछे देखा। कछुआ तो बहुत दूर था। खरगोश ने सोचा, मैं तो बहुत आगे हूँ। थोड़ी देर इस नरम घास पर आराम कर लेता हूँ। वह एक पेड़ की छाँव में लेट गया। हवा धीरे-धीरे बह रही थी। पत्ते हौले-हौले हिल रहे थे। खरगोश को नींद आ गई। वह मीठी नींद में सो गया।

इधर कछुआ चलता रहा। एक कदम, फिर एक कदम। वह रुका नहीं। उसने सोते हुए खरगोश को देखा और मुस्कुराया। उसने उसे जगाया नहीं। वह चुपचाप आगे बढ़ता रहा।

जब खरगोश की नींद खुली, सूरज ढलने लगा था। उसने देखा कछुआ तो पेड़ के पास पहुँच चुका था। खरगोश दौड़ा, पर कछुआ पहले ही पहुँच गया था। सारे जानवरों ने हौले से ताली बजाई।

खरगोश पास आया। उसने प्यार से कछुए को गले लगाया। उसने कहा, कछुए भाई, आज मैंने एक मीठी बात सीखी। धीरे-धीरे चलने वाला भी अपनी मंज़िल पा लेता है, अगर वह रुकता नहीं। कछुआ मुस्कुराया और बोला, और तुम बहुत प्यारे दोस्त हो खरगोश भाई।

दोनों हँसे। दोनों ने एक-दूसरे का हाथ पकड़ा। वे अच्छे दोस्त बन गए।

अब शाम हो चली थी। आसमान में चाँद निकल आया था। तारे टिमटिमाने लगे। खरगोश अपनी मुलायम बिल में चला गया। कछुआ अपने सुंदर घर में सिमट गया। जंगल के सारे जानवर अपने-अपने घोंसलों और बिलों में लौट गए।

हवा बहुत प्यारी थी। चाँदनी चारों ओर फैली थी। और सभी खुशी-खुशी सो गए। शुभ रात्रि, प्यारे बच्चे। मीठे सपने।

कहानी की सीख

धीमे चलो, पर रुको मत: लगातार चलने वाला ही मंज़िल तक पहुँचता है।

कहानी के बाद बच्चे से पूछिए

  1. खरगोश दौड़ के बीच में क्यों सो गया?
  2. कछुए ने सोते हुए खरगोश को देखकर क्या किया? तुम होते तो क्या करते?
  3. कौन-सा काम तुम रोज़ थोड़ा-थोड़ा करके पूरा कर सकते हो?

सही-ग़लत जवाब नहीं ढूँढने हैं; बच्चा अपने शब्दों में बताए, बस इतना।

यही कहानी आवाज़ में

VV ऐप में यह कहानी धीमी, शांत आवाज़ में है (3 मिनट), सोने से पहले सुनाने के लिए। सुनना मुफ़्त है; पहली बार लगभग 30 सेकंड का मुफ़्त sign-up करना होता है।

ऐप में सुनिए →

मूल कहानी से फ़र्क

यह ईसप की पुरानी कथा है, जो दुनिया भर में सुनाई जाती है। हमारी सोने से पहले वाली कहानी में अंत में खरगोश और कछुआ दोस्त बन जाते हैं, ताकि बच्चा हार-जीत नहीं, सीख लेकर सोए।

VV Bachpan · माँ-पापा के लिए

कहानी के बाद, आगे क्या?

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

खरगोश और कछुआ की कहानी से क्या सीख मिलती है?

धीमे चलो, पर रुको मत: लगातार चलने वाला ही मंज़िल तक पहुँचता है।

खरगोश और कछुआ की कहानी छोटे में (short में) कैसे सुनाएँ?

तेज़ दौड़ने वाले खरगोश ने धीमे कछुए को खेल-खेल में दौड़ के लिए बुलाया। आगे निकलकर खरगोश पेड़ की छाँव में सो गया, और कछुआ बिना रुके चलता रहा। कछुआ पहले पहुँचा। खरगोश ने सीखा कि रुके बिना चलने वाला भी मंज़िल पा लेता है, और दोनों दोस्त बन गए।

यह कहानी किस उम्र के बच्चों के लिए है?

3 से 8 साल के बच्चों के लिए। भाषा आसान है और अंत शांत, ताकि सोने से पहले सुनाई जा सके। 8 साल से बड़े बच्चे इसे ख़ुद पढ़ सकते हैं।

क्या यह कहानी आवाज़ में सुन सकते हैं?

हाँ। यही कहानी VV ऐप में धीमी, सोने से पहले वाली आवाज़ में है (3 मिनट)। सुनना मुफ़्त है; पहली बार लगभग 30 सेकंड का मुफ़्त sign-up करना होता है।

क्या यह मूल कहानी जैसी ही है?

यह ईसप की पुरानी कथा है, जो दुनिया भर में सुनाई जाती है। हमारी सोने से पहले वाली कहानी में अंत में खरगोश और कछुआ दोस्त बन जाते हैं, ताकि बच्चा हार-जीत नहीं, सीख लेकर सोए।