
44+ भगवद्गीता / भगवान श्रीकृष्ण के विचार
श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को दिया गया निष्काम कर्म का कालातीत ज्ञान
भगवद्गीता / भगवान श्रीकृष्ण कौन थे? (कालातीत (महाभारत काल))
भगवद्गीता सनातन परंपरा का सर्वाधिक पूजनीय ग्रंथ है, जिसमें कुरुक्षेत्र की युद्धभूमि पर भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को दिए गए दिव्य उपदेश संकलित हैं। जब अर्जुन कर्तव्य और मोह के द्वंद्व में विचलित हो उठे, तब श्रीकृष्ण ने उन्हें कर्म, ज्ञान और भक्ति का शाश्वत मार्ग दिखाया। गीता का केंद्रीय संदेश है निष्काम कर्म — ‘कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन’, अर्थात् कर्म पर तुम्हारा अधिकार है, फल पर नहीं। यह सिखाती है कि पूरी निष्ठा से अपना कर्तव्य निभाओ, परंतु परिणाम की आसक्ति से मुक्त रहो। आत्मा की अमरता, समत्व-योग, स्थिर बुद्धि और अपने धर्म पर अडिग रहने का इसका दर्शन आज भी तनाव, दुविधा और जीवन के संघर्षों में अद्भुत मार्गदर्शन देता है। भगवद्गीता केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि आत्म-विकास, निर्णय-क्षमता और मन को साधने का कालातीत जीवन-दर्शन है।
भगवद्गीता / भगवान श्रीकृष्ण Quotes in Hindi
जब तक लक्ष्य न मिले, तब तक इधर-उधर मत देखो।
— अर्जुन (भगवद्गीता), श्रीमद्भगवद्गीता
VV ka Vichar:
अर्जुन को जब पूछा गया 'क्या दिख रहा है?' तो बोला 'सिर्फ मछली की आँख।' यही tunnel vision चाहिए। अपने goal को इतना clear visualize करो कि distractions invisible हो जाएं। Daily visualization 5 min करो।
प्रकृतेः क्रियमाणानि गुणैः कर्माणि सर्वशः — सारे कर्म प्रकृति के गुणों द्वारा किए जाते हैं, लेकिन अहंकार से भरा मनुष्य सोचता है कि मैं कर्ता हूँ।
— भगवान श्रीकृष्ण, भगवद्गीता 3.27
VV ka Vichar:
Ego सबसे बड़ा रोड़ा है। "मैंने किया" की जगह "टीम ने किया" बोलो — सफलता credit share करने से आती है।
भगवद्गीता / भगवान श्रीकृष्ण जैसी सोच अपनाएं
इन विचारों को गहराई से समझने और जीवन में उतारने के लिए VV की किताबें —