संकष्टी चतुर्थी
Sankashti Chaturthi
📖 संकष्टी चतुर्थी के बारे में
संकष्टी चतुर्थी हिंदू पंचांग की कृष्ण पक्ष की चौथी तिथि को रखा जाने वाला भगवान गणेश का प्रमुख व्रत है। "संकष्टी" शब्द संस्कृत के "संकट" + "हरी" से बना है — अर्थात् "संकट दूर करने वाली"। यह व्रत हर महीने एक बार आता है (केवल कृष्ण पक्ष में) — वर्ष में कुल 12-13 संकष्टी चतुर्थी पड़ती हैं। हर संकष्टी का अपना नाम होता है — वक्रतुंडी, एकदंत, कृष्णपिंगल, गजानन, हेरंब, विघ्नराज, लंबोदर, विभुवन, भालचंद्र, पौष संकष्टी (अखुरथ), माघ संकष्टी (तिलकुंद), फाल्गुन (भालचंद्र), आदि। **महाराष्ट्र में "अंगारकी चतुर्थी":** जब संकष्टी चतुर्थी मंगलवार को पड़े, तो उसे "अंगारकी संकष्टी चतुर्थी" कहते हैं — यह सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है। मान्यता है कि अंगारकी चतुर्थी के एक ही व्रत से पूरे जीवन के संकट दूर हो जाते हैं और गणेश जी स्वयं दर्शन देते हैं। यह वर्ष में 1-2 बार ही आती है। **पौराणिक कथा:** गणेश पुराण और मुद्गल पुराण में वर्णित है कि एक बार देवताओं पर भयंकर संकट आया — त्रिपुरासुर, तारकासुर जैसे दैत्यों ने उन्हें हरा दिया। सभी देवता भगवान शिव के पास गए। शिव ने कहा — "चतुर्थी को गणेश की आराधना करो, वही संकट हरेंगे।" देवताओं ने व्रत किया और गणेश ने संकट दूर किए। तभी से यह व्रत "संकष्टी" कहलाया। दूसरी कथा — माता पार्वती ने अपने पुत्र गणेश को द्वारपाल बनाकर स्नान करते समय किसी को अंदर न आने देने को कहा। शिव लौटे, गणेश ने रोका, शिव ने क्रोध में गणेश का सिर काट दिया। पार्वती के विलाप पर शिव ने हाथी का सिर लगाकर गणेश को पुनर्जीवित किया। यह घटना भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी (गणेश चतुर्थी) पर हुई — परंतु प्रत्येक कृष्ण चतुर्थी पर गणेश का विशेष स्मरण होता है। **व्रत की अनोखी बात — चंद्र दर्शन:** संकष्टी चतुर्थी "चंद्रोदय से चंद्रोदय" तक मनाई जाती है — यानी सुबह सूर्योदय से शुरू होकर रात में चंद्र दर्शन तक। व्रती पूरा दिन उपवास रखते हैं और रात को चंद्रमा के दर्शन करके, उसे अर्घ्य देकर ही व्रत तोड़ते हैं। चंद्र दर्शन के बिना व्रत अधूरा माना जाता है। यह व्रत की सबसे विशिष्ट पहचान है। **क्षेत्रीय विविधताएँ:** - **महाराष्ट्र:** संकष्टी चतुर्थी का सबसे बड़ा महत्व। मुंबई, पुणे, नाशिक में हर घर में व्रत रखा जाता है। अंगारकी चतुर्थी पर लाखों लोग सिद्धिविनायक मंदिर जाते हैं। - **कर्नाटक, आंध्र:** "संकष्टी" या "संकटहर चतुर्थी" — गणेश मंदिर में विशेष अभिषेक। - **तमिलनाडु:** "संकदहर चतुर्थी" — पिल्लयार (गणेश) को मोदक, अवल (पोहा) का भोग। - **उत्तर भारत:** "कुंद चतुर्थी", "तिलकुंद चतुर्थी" — तिल के लड्डू का भोग। - **गुजरात:** "संकष्ट चोथ" — मोदक, लड्डू प्रसाद। - **बंगाल:** गणेश चतुर्थी को ही अधिक महत्व, संकष्टी का कम। **वैज्ञानिक दृष्टिकोण:** पूरे दिन उपवास और रात को चंद्र दर्शन के बाद भोजन — यह "सर्केडियन फास्टिंग" का ही रूप है। 12-14 घंटे का उपवास शरीर में ऑटोफेजी, इंसुलिन संवेदनशीलता, और पाचन विश्राम लाता है। चंद्र दर्शन का मनोवैज्ञानिक प्रभाव भी महत्वपूर्ण है — रात में आकाश देखना, चंद्रमा पर ध्यान लगाना, मन को शांत करता है और मेलाटोनिन स्राव बढ़ाता है। **कौन करे, कौन न करे:** यह व्रत संतान-विशेष रूप से पुत्र-सुख चाहने वाली माताओं, विद्यार्थियों (बुद्धि-विद्या के लिए), व्यापारियों (व्यवसाय में बाधा दूर), और किसी भी प्रकार के संकट में घिरे व्यक्ति के लिए विशेष लाभदायक है। गर्भवती महिलाएँ, बच्चे (10 वर्ष से कम), मधुमेह रोगी निर्जला व्रत न करें — फलाहार लें। जिनकी कुंडली में बुध दोष, केतु दोष, या विद्या बाधा है, उन्हें यह व्रत अवश्य रखना चाहिए।
📆 संकष्टी चतुर्थी कब है?
अगला संकष्टी चतुर्थी 5 मई 2026, मंगलवार को है। यह वैशाख मास की चतुर्थी तिथि को पड़ता है। नीचे पूरे साल की तिथियाँ देखें।
🙏 महत्व (Significance)
संकष्टी चतुर्थी "संकट से मुक्ति और विघ्न नाश" का व्रत है — गणेश जी "विघ्नहर्ता" और "मंगलमूर्ति" दोनों हैं। **पौराणिक महिमा:** गणेश पुराण के अनुसार, एक बार ऋषि विश्वामित्र ने भगवान विष्णु से पूछा — "सभी व्रतों में श्रेष्ठ व्रत कौन सा है?" विष्णु ने उत्तर दिया — "संकष्टी चतुर्थी।" उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति 21 संकष्टी चतुर्थी निष्ठा से करता है, उसके जीवन का कोई भी संकट गणेश जी दूर कर देते हैं। मुद्गल पुराण में 32 गणेश रूपों का वर्णन है, और हर संकष्टी पर अलग रूप की पूजा होती है। स्कंद पुराण में कहा गया है कि अंगारकी चतुर्थी (मंगलवार को पड़ने वाली) का एक व्रत 21 संकष्टी के बराबर है। **गणेश जी कौन हैं?** - **प्रथम पूज्य** — किसी भी शुभ कार्य से पहले उनकी पूजा - **विघ्नहर्ता** — बाधाओं को दूर करने वाले - **बुद्धि-विद्या के देवता** — विद्यार्थियों, लेखकों, कलाकारों के आराध्य - **गणपति** — सभी देवगणों के अधिपति - **सिद्धिदाता** — सिद्धियाँ प्रदान करने वाले - **मंगलमूर्ति** — शुभता के प्रतीक **ज्योतिषीय महत्व:** गणेश जी का संबंध **केतु ग्रह** से है (कुछ परंपराओं में बुध से भी)। जिनकी कुंडली में: - **केतु दोष** है — संकष्टी चतुर्थी नियमित करें - **बुध दोष** है (बुध कमजोर, नीच, या दुष्प्रभाव में) — बुद्धि, विद्या, व्यवसाय बाधा - **विद्या बाधा** है — छात्रों को परीक्षा में सफलता नहीं मिल रही - **संतान बाधा** है — विशेषकर पुत्र सुख की इच्छा - **व्यवसाय में विघ्न** — नया काम शुरू नहीं हो रहा, रुकावटें - **अंगारक योग/मंगल दोष** — अंगारकी चतुर्थी का विशेष महत्व **विशिष्ट संकष्टी और उनका फल:** - **वक्रतुंडी (चैत्र):** नए वर्ष में सभी बाधाएँ दूर - **एकदंत (वैशाख):** एकाग्रता, ध्यान में सफलता - **कृष्णपिंगल (ज्येष्ठ):** क्रोध नियंत्रण, शत्रु शांति - **गजानन (आषाढ़):** स्वास्थ्य, दीर्घायु - **हेरंब (श्रावण):** निर्भयता, साहस - **विघ्नराज (भाद्रपद):** सभी विघ्न नाश - **विभुवन (आश्विन):** समृद्धि, ऐश्वर्य - **गणाधिप (कार्तिक):** नेतृत्व क्षमता, प्रसिद्धि - **अखुरथ (मार्गशीर्ष):** वाहन सुख, यात्रा में सुरक्षा - **तिलकुंद (पौष):** पितृ शांति, तिल के लड्डू का भोग - **संकटहरण (माघ):** सभी जीवन संकट दूर - **भालचंद्र (फाल्गुन):** चंद्र दोष, मानसिक शांति **अंगारकी चतुर्थी का विशेष फल:** जब चतुर्थी मंगलवार को पड़े, अंगारक (मंगल) और गणेश एक साथ प्रसन्न होते हैं। कहा जाता है कि अंगारकी चतुर्थी का एक व्रत = 21 साधारण चतुर्थी। महाराष्ट्र में इस दिन सिद्धिविनायक मंदिर में 24 घंटे दर्शन चलते हैं, 10-15 लाख भक्त आते हैं। **वैज्ञानिक दृष्टिकोण:** - **उपवास का विज्ञान:** 12-14 घंटे का इंटरमिटेंट फास्टिंग — ऑटोफेजी, इंसुलिन रिसेट, वजन नियंत्रण - **मोदक का विज्ञान:** गुड़ (आयरन), नारियल (मीडियम चेन फैट, ब्रेन फ्यूल), चावल का आटा (क्विक एनर्जी) — उपवास तोड़ने के लिए आदर्श संयोजन - **दूर्वा (21 दंठल) का विज्ञान:** दूर्वा घास में एंटीऑक्सीडेंट, एंटीबैक्टीरियल गुण हैं; हाथों में मसलने से त्वचा पर लाभ - **चंद्र दर्शन का विज्ञान:** रात में आकाश देखना, एक बिंदु पर ध्यान लगाना — मेडिटेशन का ही रूप है, मेलाटोनिन बढ़ाता है, नींद सुधारता है - **गणेश मंत्र की ध्वनि:** "ॐ गं गणपतये नमः" — "गं" बीज मंत्र की ध्वनि मूलाधार चक्र को उत्तेजित करती है, जो साहस और स्थिरता का केंद्र है **आध्यात्मिक दृष्टिकोण:** गणेश जी का स्वरूप प्रतीकात्मक है: - **हाथी का सिर** — विशाल बुद्धि, दूर तक सोचने की क्षमता - **बड़े कान** — अधिक सुनो, कम बोलो - **छोटी आँखें** — एकाग्रता - **बड़ा पेट** — सभी अच्छी-बुरी बातें पचाने की क्षमता - **एक दाँत** — एकलक्ष्य, निर्णय में दृढ़ता - **सूँड** — लचीलापन और शक्ति दोनों - **मूषक वाहन** — छोटी इच्छाओं (मूषक = चूहा) पर नियंत्रण संकष्टी चतुर्थी हमें यही सिखाती है — जीवन के "संकटों" को गणेश जी की तरह देखो: बुद्धि से, धैर्य से, एकाग्रता से। समस्या बाहर नहीं, भीतर है। जब मन शांत और एकाग्र हो, तब कोई विघ्न नहीं रुक सकता।
📋 संकष्टी चतुर्थी कैसे रखें? — नियम
संकष्टी चतुर्थी व्रत के नियम स्पष्ट हैं — "चंद्रोदय तक उपवास, चंद्र दर्शन से पारण।" **तृतीया की रात (एक दिन पहले):** हल्का, सात्विक भोजन। तामसिक वर्जित। रात्रि ब्रह्मचर्य। सोने से पहले गणेश जी का स्मरण — "ॐ गं गणपतये नमः" 11 बार। **चतुर्थी के दिन का क्रम:** - ब्रह्म मुहूर्त में उठें (सूर्योदय से 1:30 घंटे पहले) - स्नान करें, लाल या पीले वस्त्र पहनें - घर के पूजा स्थान की सफाई करें - गणेश जी की मूर्ति/चित्र के सामने दीप जलाएँ (घी का दीप श्रेष्ठ) - संकल्प लें — "आज मैं संकष्टी चतुर्थी व्रत रखूँगा/रखूँगी, भगवान गणेश मेरे संकट दूर करें" - गणेश जी को दूर्वा (21 दंठल की माला), लाल फूल, अक्षत, रोली चढ़ाएँ - मोदक का भोग लगाएँ (या बूँदी लड्डू) - "ॐ गं गणपतये नमः", "वक्रतुंड महाकाय..." मंत्र का 108 बार जाप - गणेश चालीसा, संकष्ट नाशन स्तोत्र, या गणेश अथर्वशीर्ष का पाठ - दोपहर में उस विशेष संकष्टी की कथा सुनें/पढ़ें (जैसे अखुरथ संकष्टी की अलग कथा, विभुवन की अलग) - पूरा दिन उपवास (फलाहार या निराहार — अपनी क्षमता के अनुसार) - **शाम को विशेष पूजा** — चंद्रोदय से 1 घंटे पहले पुनः स्नान, पूजा, आरती - चंद्रोदय होते ही (पंचांग में समय देखें) चंद्र दर्शन करें - चंद्र को अर्घ्य दें — जल + सफेद फूल + अक्षत + चंदन - "चंद्रमसे नमः" मंत्र बोलें - गणेश जी को मोदक का भोग लगाएँ, फिर स्वयं प्रसाद ग्रहण करके व्रत तोड़ें **क्या न करें (15+ नियम):** 1. चंद्र दर्शन से पहले भोजन कतई न करें 2. मांस, मछली, अंडा, मदिरा वर्जित 3. लहसुन, प्याज न खाएँ 4. तुलसी पत्ता गणेश जी को न चढ़ाएँ (गणेश और तुलसी का पौराणिक विवाद है) 5. गणेश को सूखे फूल, बासी फूल न चढ़ाएँ 6. झूठ, क्रोध, कलह से दूर रहें 7. दिन में नींद न लें 8. नाखून, बाल, दाढ़ी न कटवाएँ 9. ब्रह्मचर्य पालन 10. दाएँ हाथ से पूजा करें 11. गणेश मूर्ति की पीठ न दिखाएँ 12. टूटे चावल, टूटी दूर्वा न चढ़ाएँ 13. चंद्र दर्शन से पहले कुछ भी अनुचित न बोलें 14. काले वस्त्र न पहनें 15. गणेश जी को 21 दूर्वा ही चढ़ाएँ (संख्या महत्वपूर्ण) 16. मोदक अवश्य हो भोग में — गणेश का प्रिय 17. दूसरों का अपमान न करें, विशेषकर बच्चों का **पारण (व्रत तोड़ना):** - चंद्र दर्शन होते ही पूजा - अर्घ्य — जल, दूध, सफेद फूल, अक्षत मिलाकर चंद्र को अर्पण - गणेश जी को पहले मोदक/लड्डू चढ़ाएँ - फिर स्वयं प्रसाद (मोदक, लड्डू) से व्रत तोड़ें - उसके बाद एक समय का सादा भोजन — चावल, दाल, सब्जी, रोटी (बिना लहसुन-प्याज) **महिलाओं के लिए:** विशेष रूप से माताएँ संतान (विशेषकर पुत्र) के सुख और रक्षा के लिए यह व्रत रखती हैं। मासिक धर्म में पूजा न करें, पर मानसिक संकल्प जारी रखें। गर्भवती महिलाएँ फलाहार रखें। **विद्यार्थियों के लिए:** परीक्षा से पहले संकष्टी चतुर्थी व्रत रखना विशेष लाभदायक — गणेश बुद्धि और विद्या के देवता हैं। **कामकाजी लोगों के लिए:** दिन में दूध-फल पर रहें। ऑफिस से घर आकर शाम को विस्तार से पूजा करें। चंद्र दर्शन आवश्यक है — छत पर जाएँ, बालकनी से देखें।
🍽️ व्रत में क्या खाएँ, क्या न खाएँ
संकष्टी चतुर्थी में दिन भर उपवास और रात को चंद्र दर्शन के बाद ही भोजन — यही मुख्य नियम है। भोजन सात्विक और गणेश-प्रसाद प्रधान हो। **क्या खा सकते हैं (दिन में फलाहार के रूप में):** - ताजे फल — केला (गणेश जी का प्रिय), सेब, अनार, संतरा, आम, अंगूर - दूध और दुग्ध उत्पाद — दूध, दही, घी, पनीर, छाछ - सूखे मेवे — बादाम, काजू, किशमिश, मखाना, पिस्ता, अखरोट - साबूदाना — खिचड़ी, वड़ा - कुट्टू का आटा — पूरी, पकौड़ी - सिंघाड़े का आटा — हलवा - राजगिरा — लड्डू - आलू, शकरकंद (कंद मूल) - सेंधा नमक - शहद, गुड़, मिश्री, चीनी - नारियल, नारियल पानी - गन्ने का रस **पारण के लिए विशेष (चंद्र दर्शन के बाद):** - **मोदक** — गणेश जी का सर्वप्रिय भोग। चावल के आटे की खोल में नारियल-गुड़ की स्टफिंग (उकडीचे मोदक, महाराष्ट्र शैली) - **बूँदी लड्डू** — बेसन की बूँदी + चाशनी + घी - **तिल के लड्डू** (माघ चतुर्थी — तिलकुंद पर विशेष) - **नारियल के लड्डू** - **अवल (पोहा)** + गुड़ — तमिलनाडु परंपरा - **खीर** — चावल की, साबूदाने की - **पूरन पोली** (महाराष्ट्र/गुजरात) — चना दाल + गुड़ स्टफिंग **क्या नहीं खा सकते:** - मांस, मछली, अंडा, मदिरा - लहसुन, प्याज, बैंगन, मशरूम, मूली - सामान्य नमक (फलाहार में सेंधा) - तामसिक मसाले - बासी भोजन, पैकेज्ड फूड - गेहूँ/चावल (यदि कठोर व्रत रखा है) - तुलसी पत्ता (गणेश को नहीं चढ़ता, पर फलाहार में प्रयोग न करें उस दिन) **नमूना दिन का मेनू:** - **सुबह (6 बजे):** गुनगुना पानी + शहद-नींबू, 5 बादाम, 2 खजूर - **नाश्ता (9 बजे):** केला दूध शेक, मखाना खीर, 1 सेब - **दोपहर (1 बजे):** साबूदाना खिचड़ी (घी-जीरा-मूँगफली-सेंधा नमक), दही, नारियल पानी - **शाम (4-5 बजे):** केवल फल और दूध; 4-5 भीगे बादाम - **चंद्र दर्शन (रात 8-9 बजे — समय अलग):** चंद्र अर्घ्य, फिर गणेश को मोदक भोग, फिर स्वयं पारण - **पारण भोजन (9-10 बजे):** मोदक, बूँदी लड्डू, एक गिलास दूध, फिर सादा भोजन — चावल + तूअर दाल + घी + आलू की सब्जी + रोटी (बिना लहसुन-प्याज) **मोदक रेसिपी (सरल — उकडीचे मोदक):** - चावल के आटे 1 कप को 1 कप उबलते पानी में डालकर गूँध लें - स्टफिंग: 1 कप कद्दूकस नारियल + 3/4 कप गुड़ + 1 चम्मच घी + इलायची — पिघला लें - छोटी लोई लें, कटोरी बनाएँ, स्टफिंग भरें, ऊपर से गाथ बंद करें - 10-15 मिनट भाप में पकाएँ - गर्मागर्म घी के साथ गणेश को भोग लगाएँ **प्रसिद्ध संकष्टी रेसिपी:** उकडीचे मोदक, तला मोदक, बूँदी लड्डू, नारियल के लड्डू, तिल के लड्डू, पूरन पोली, साबूदाना खिचड़ी, केले के पकौड़े। **हाइड्रेशन:** दिन भर पानी, नारियल पानी, नींबू पानी, दूध। चंद्र अर्घ्य के समय का जल भी कुछ लोग पीते हैं। निर्जला संकष्टी (कठोर व्रत) केवल स्वस्थ वयस्क करें।
आगामी संकष्टी चतुर्थी तिथियाँ (2026-2027)
💪 VV Challenge — अनुशासन की शक्ति
**VV Challenge — विघ्नहर्ता का अभ्यास:** संकष्टी चतुर्थी केवल मोदक खाने का दिन नहीं — यह "संकट से मुकाबला करने की बुद्धि" विकसित करने का दिन है। गणेश जी का पेट बड़ा है क्योंकि वे सब कुछ पचा सकते हैं — तुम भी सीखो। **30-दिन का चैलेंज (1 चतुर्थी से अगली तक):** - हर सुबह उठकर लिखें: "आज मेरे सामने 3 सबसे बड़े विघ्न क्या हैं?" (काम, पढ़ाई, रिश्ते, स्वास्थ्य — कोई भी) - दिन में कम से कम 1 विघ्न पर ठोस कदम उठाएँ (छोटा सा भी) - रोज़ 11 बार "ॐ गं गणपतये नमः" का जाप — 2 मिनट लगते हैं - रोज़ 15 मिनट का "Deep Focus" सत्र — कोई मोबाइल, कोई शोर, केवल एक काम - रात को लिखें: "आज कौन सा विघ्न कम हुआ? मैंने कौन सी बुद्धि का प्रयोग किया?" **चंद्र दर्शन के बाद (संकष्टी की रात):** - पिछले 30 दिन के सभी विघ्नों की लिस्ट बनाएँ - उनके सामने लिखें — "समाधान क्या है?" - चंद्र अर्घ्य देते समय अगले 30 दिन का एक स्पष्ट संकल्प लें **ट्रैक करें:** - 30 दिन में कुल विघ्न सामना किए (count) - कितने हल हुए (%) - Deep Focus सत्र कितने पूरे किए (target: 25/30) - बुद्धि-परीक्षा — कठिन निर्णय कितने सही निकले 1 चतुर्थी साइकल के बाद आप देखेंगे — समस्याएँ अब "संकट" नहीं लगतीं, "पहेलियाँ" लगती हैं। यही गणेश-बुद्धि है। मोदक सिर्फ इनाम है।
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संकष्टी चतुर्थी व्रत क्या होता है?
संकष्टी चतुर्थी हिंदू पंचांग की कृष्ण पक्ष की चौथी तिथि को रखा जाने वाला भगवान गणेश का प्रमुख व्रत है। "संकष्टी" शब्द संस्कृत के "संकट" + "हरी" से बना है — अर्थात् "संकट दूर करने वाली"। यह व्रत हर महीने एक बार आता है (केवल कृष्ण पक्ष में) — वर्ष में कुल 12-13 संकष्टी चतुर्थी पड़ती हैं। हर संकष्टी का अपना नाम होता है — वक्रतुंडी, एकदंत, कृष्णपिंगल, गजानन, हेरंब, विघ्नराज, लंबोदर, विभुवन, भालचंद्र,
संकष्टी चतुर्थी कब है?
अगला संकष्टी चतुर्थी 5 मई 2026, मंगलवार को है (वैशाख, चतुर्थी)। पूरे साल की तिथियाँ नीचे दी गई हैं।
संकष्टी चतुर्थी कैसे रखें?
संकष्टी चतुर्थी व्रत के नियम स्पष्ट हैं — "चंद्रोदय तक उपवास, चंद्र दर्शन से पारण।" **तृतीया की रात (एक दिन पहले):** हल्का, सात्विक भोजन। तामसिक वर्जित। रात्रि ब्रह्मचर्य। सोने से पहले गणेश जी का स्मरण — "ॐ गं गणपतये नमः" 11 बार। **चतुर्थी के दिन का क्रम:** - ब्रह्म मुहूर्त में उठें (सूर्योदय से 1:30 घंटे पहले) - स्नान करें, लाल या पीले वस्त्र पहनें - घर के पूजा स्थान की सफाई करें - गणेश जी की मूर्ति/चित्र के सामने दीप जलाएँ (घी का दीप श्रेष्ठ) - संकल्प लें — "आज मैं संकष्टी चतुर्थी व्रत रखूँग
संकष्टी चतुर्थी में क्या खाएँ?
संकष्टी चतुर्थी में दिन भर उपवास और रात को चंद्र दर्शन के बाद ही भोजन — यही मुख्य नियम है। भोजन सात्विक और गणेश-प्रसाद प्रधान हो। **क्या खा सकते हैं (दिन में फलाहार के रूप में):** - ताजे फल — केला (गणेश जी का प्रिय), सेब, अनार, संतरा, आम, अंगूर - दूध और दुग्ध उत्पाद — दूध, दही, घी, पनीर, छाछ - सूखे मेवे — बादाम, काजू, किशमिश, मखाना, पिस्ता, अखरोट - साबूदाना — खिचड़ी, वड़ा - कुट्टू का आटा — पूरी, पकौड़ी - सिंघाड़े का आटा — हलवा - राजगिरा — लड्डू - आलू, शकरकंद (कंद मूल) - सेंधा नमक - शहद, गुड़, म
संकष्टी चतुर्थी में क्या न करें?
चावल, गेहूँ, दालें, मांस-मदिरा, प्याज-लहसुन, और तामसिक भोजन वर्जित है। झूठ, क्रोध, हिंसा और कटु वचनों से बचें। ब्रह्मचर्य का पालन करें। दिन में सोने से बचें।
संकष्टी चतुर्थी का क्या महत्व है?
संकष्टी चतुर्थी "संकट से मुक्ति और विघ्न नाश" का व्रत है — गणेश जी "विघ्नहर्ता" और "मंगलमूर्ति" दोनों हैं। **पौराणिक महिमा:** गणेश पुराण के अनुसार, एक बार ऋषि विश्वामित्र ने भगवान विष्णु से पूछा — "सभी व्रतों में श्रेष्ठ व्रत कौन सा है?" विष्णु ने उत्तर दिया — "संकष्टी चतुर्थी।" उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति 21 संकष्टी चतुर्थी निष्ठा से करता है, उसके जीवन का कोई भी संकट गणेश जी दूर कर देते हैं। मुद्गल पुराण में 32 गणेश रूपों का वर्णन है, और हर संकष्टी पर अलग रूप की पूजा होती है। स्कंद पुराण में कह
संकष्टी चतुर्थी के दिन क्या ध्यान रखें?
ब्रह्म मुहूर्त में उठें। स्नान के बाद साफ वस्त्र पहनें। व्रत का संकल्प लें। पूजा स्थल को साफ रखें। मन में ईष्ट देवता का ध्यान करें। झगड़ा, निंदा और नकारात्मक विचारों से दूर रहें।
व्रत तोड़ने (पारण) का सही तरीका क्या है?
पारण अगले दिन शुभ मुहूर्त में सूर्योदय के बाद किया जाता है। पहले स्नान करें, भगवान को भोग लगाएँ, फिर स्वयं सात्विक भोजन से व्रत खोलें। पारण के समय का विशेष ध्यान रखें — शास्त्रानुसार सही समय पर ही व्रत तोड़ें।