छोटे में कहानी
- नदी किनारे जामुन के पेड़ पर रहने वाला बंदर मीठू, मगरमच्छ मगरू को जामुन खिलाता था, और दोनों पक्के दोस्त बन गए।
- मगरू मीठू को पीठ पर बिठाकर अपनी पत्नी से मिलवाने ले चला, पर बीच नदी में मीठू को याद आया कि उसने माँ को बताया ही नहीं।
- दोनों लौटे, मीठू ने माँ को बताया, और अगले दिन सबकी मुलाक़ात हँसी-खुशी हुई।
पूरी कहानी
बहुत समय पहले, एक शांत नदी के किनारे एक बड़ा जामुन का पेड़ खड़ा था। उस पेड़ पर मीठे मीठे जामुन लगते थे। उसी पेड़ पर एक नन्हा बंदर रहता था। उसका नाम था मीठू। मीठू की आँखें चमकती थीं और पूँछ हवा में हौले हौले हिलती थी।
नदी के पानी में एक बड़ा सा मगरमच्छ रहता था। उसका नाम था मगरू। मगरू बहुत भोला और सीधा सादा था। हर दोपहर वह तैरते तैरते पेड़ के नीचे आ जाता।
एक दिन मीठू ने ऊपर से एक मीठा जामुन मगरू की तरफ गिराया। मगरू ने उसे चखा और मुस्कुरा दिया। उसने कहा, मीठू भैया, यह तो बहुत मीठा है। मीठू हँसकर बोला, लो, और भी खाओ।
उस दिन से दोनों पक्के दोस्त बन गए। हर दोपहर मीठू पेड़ से जामुन गिराता और मगरू नीचे बैठकर खाता। दोनों खूब बातें करते। कभी बादलों की, कभी तितलियों की, कभी नदी की लहरों की।
एक शाम मगरू थोड़ा उदास लग रहा था। मीठू ने पूछा, क्या हुआ मित्र। मगरू बोला, मेरी पत्नी नदी के उस पार रहती है। वह आजकल अकेली है और उदास है। काश कोई उसे हँसा पाता।
मीठू ने सोचा और बोला, तुम चिंता मत करो। मगरू के मन में एक विचार आया। उसने कहा, मीठू, क्या तुम मेरी पीठ पर बैठकर उस पार चलोगे। तुम्हारी बातों से मेरी पत्नी खुश हो जाएगी।
मीठू खुश हो गया और बोला, ज़रूर चलूँगा। वह मगरू की चौड़ी पीठ पर बैठ गया। मगरू धीरे धीरे तैरने लगा। पानी शांत था। ऊपर आसमान में हल्के हल्के बादल तैर रहे थे।
नदी के बीच में पहुँचकर मीठू को अचानक कुछ याद आया। उसने प्यार से कहा, मगरू मित्र, एक बात तो मैं भूल ही गया। मेरी माँ पेड़ पर मेरा इंतज़ार कर रही होगी। मैंने उसे बताया ही नहीं कि मैं कहाँ जा रहा हूँ। वह परेशान हो जाएगी।
मगरू रुक गया। उसने सोचा और बोला, सच में, मैंने भी तो तुम्हें पहले बताया ही नहीं था कि कहाँ ले जा रहा हूँ। यह मेरी गलती है मित्र। मुझे तुमसे पहले पूछना चाहिए था।
मीठू ने हौले से कहा, कोई बात नहीं। चलो वापस चलते हैं। मैं माँ को बता दूँगा, फिर कल हम दोनों साथ चलेंगे। तुम्हारी पत्नी से मिलूँगा, उसे खूब सारी कहानियाँ सुनाऊँगा।
मगरू मुस्कुराया और बोला, तुम सच में समझदार हो मीठू। चलो वापस।
दोनों धीरे धीरे पेड़ के पास लौट आए। मीठू पेड़ पर चढ़ गया और माँ से मिलकर सारी बात बताई। माँ ने प्यार से उसका सिर सहलाया और बोली, बेटा, अच्छा किया जो बताकर जाओगे।
अगले दिन दोपहर में मीठू ने पत्तों में कुछ मीठे जामुन बाँधे। मगरू उसे लेकर नदी के उस पार गया। मगरू की पत्नी मीठू को देखकर बहुत खुश हुई। मीठू ने उसे बादलों की, तितलियों की, और चाँद की ढेर सारी बातें सुनाईं। वह खिलखिलाकर हँस पड़ी।
शाम होने लगी। आसमान नारंगी हो गया। मगरू ने मीठू को वापस पेड़ के पास छोड़ दिया। मीठू पेड़ पर चढ़ गया और नीचे झुककर हाथ हिलाया। मगरू ने भी पानी से पूँछ हिलाकर जवाब दिया।
नदी शांत हो गई। तारे एक एक करके आसमान में आने लगे। चाँद ने अपनी ठंडी रोशनी पेड़ पर बिखेर दी। मीठू अपनी माँ की गोद में लेट गया। मगरू अपनी पत्नी के पास पानी में सुस्ताने लगा।
दोनों दोस्त नदी के दो किनारों पर थे, पर उनके दिल एक दूसरे के पास थे। हवा हौले हौले चल रही थी। पत्ते चुपचाप हिल रहे थे।
और सभी खुशी-खुशी सो गए। शुभ रात्रि, प्यारे बच्चे। मीठे सपने।
कहानी की सीख
कहीं जाने से पहले घर पर बताना ज़रूरी है, और सच्चा दोस्त अपनी ग़लती मान लेता है।
कहानी के बाद बच्चे से पूछिए
- मीठू और मगरू दोस्त कैसे बने?
- बीच नदी में मीठू को क्या याद आया?
- बाहर खेलने जाने से पहले तुम घर पर किसे बताते हो?
सही-ग़लत जवाब नहीं ढूँढने हैं; बच्चा अपने शब्दों में बताए, बस इतना।
यही कहानी आवाज़ में
VV ऐप में यह कहानी धीमी, शांत आवाज़ में है (3 मिनट 55 सेकंड), सोने से पहले सुनाने के लिए। सुनना मुफ़्त है; पहली बार लगभग 30 सेकंड का मुफ़्त sign-up करना होता है।
ऐप में सुनिए →मूल कहानी से फ़र्क
पंचतंत्र की मूल कहानी में मगरमच्छ की पत्नी बंदर का दिल माँगती है, और बंदर अपनी सूझ-बूझ से जान बचाता है ("मेरा दिल तो पेड़ पर रह गया")। छोटे बच्चों के लिए हमारे संस्करण में कोई धोखा नहीं है; सीख यह है कि कहीं जाने से पहले घर पर बताना चाहिए। बड़े बच्चों को मूल कहानी की सीख, मुश्किल में भी शांत रहकर सोचना, आप अपनी ओर से सुना सकते हैं।
VV Bachpan · माँ-पापा के लिए
कहानी के बाद, आगे क्या?
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
बंदर और मगरमच्छ की कहानी से क्या सीख मिलती है?
कहीं जाने से पहले घर पर बताना ज़रूरी है, और सच्चा दोस्त अपनी ग़लती मान लेता है।
बंदर और मगरमच्छ की कहानी छोटे में (short में) कैसे सुनाएँ?
नदी किनारे जामुन के पेड़ पर रहने वाला बंदर मीठू, मगरमच्छ मगरू को जामुन खिलाता था, और दोनों पक्के दोस्त बन गए। मगरू मीठू को पीठ पर बिठाकर अपनी पत्नी से मिलवाने ले चला, पर बीच नदी में मीठू को याद आया कि उसने माँ को बताया ही नहीं। दोनों लौटे, मीठू ने माँ को बताया, और अगले दिन सबकी मुलाक़ात हँसी-खुशी हुई।
यह कहानी किस उम्र के बच्चों के लिए है?
3 से 8 साल के बच्चों के लिए। भाषा आसान है और अंत शांत, ताकि सोने से पहले सुनाई जा सके। 8 साल से बड़े बच्चे इसे ख़ुद पढ़ सकते हैं।
क्या यह कहानी आवाज़ में सुन सकते हैं?
हाँ। यही कहानी VV ऐप में धीमी, सोने से पहले वाली आवाज़ में है (3 मिनट 55 सेकंड)। सुनना मुफ़्त है; पहली बार लगभग 30 सेकंड का मुफ़्त sign-up करना होता है।
क्या यह मूल कहानी जैसी ही है?
पंचतंत्र की मूल कहानी में मगरमच्छ की पत्नी बंदर का दिल माँगती है, और बंदर अपनी सूझ-बूझ से जान बचाता है ("मेरा दिल तो पेड़ पर रह गया")। छोटे बच्चों के लिए हमारे संस्करण में कोई धोखा नहीं है; सीख यह है कि कहीं जाने से पहले घर पर बताना चाहिए। बड़े बच्चों को मूल कहानी की सीख, मुश्किल में भी शांत रहकर सोचना, आप अपनी ओर से सुना सकते हैं।