Skip to main content

Free Shipping on all Prepaid Orders! Abhi Order Karo 🚚

🪔

दिवाली / दीपावली

Diwali

दिवाली / दीपावली कब है?

तिथि गणना हो रही है...

📖 दिवाली / दीपावली के बारे में

दिवाली, जिसे दीपावली (दीप + आवली = दीपों की पंक्ति) भी कहा जाता है, भारत का सबसे बड़ा और सबसे प्रिय त्योहार है। यह कार्तिक मास की अमावस्या (कृष्ण पक्ष की पंद्रहवीं तिथि) को मनाया जाता है — वर्ष की सबसे अंधेरी रात, जिसे करोड़ों दीपों से प्रकाशमय किया जाता है। दिवाली केवल एक दिन का पर्व नहीं — यह पाँच दिवसीय उत्सव है जो धनतेरस से शुरू होकर भाई दूज तक चलता है। **पौराणिक कथाएँ (एक नहीं, चार-पाँच):** सबसे प्रसिद्ध कथा **रामायण** से है — भगवान राम 14 वर्ष के वनवास और रावण वध के बाद इसी अमावस्या को अयोध्या लौटे थे। अयोध्यावासियों ने पूरे नगर को दीपों से सजाकर अपने प्रिय राजा का स्वागत किया — यही दिवाली की पहली ज्योति मानी जाती है। दूसरी कथा **समुद्र मंथन** से जुड़ी है — इसी तिथि को माँ लक्ष्मी क्षीरसागर से प्रकट हुई थीं, इसलिए दिवाली को लक्ष्मी जी का जन्मदिवस भी कहा जाता है। तीसरी कथा **कृष्ण-नरकासुर** की है — भगवान कृष्ण ने नरकासुर का वध करके 16,000 कन्याओं को मुक्त कराया था (यह नरक चतुर्दशी को होता है, दिवाली से एक दिन पहले)। चौथी कथा **जैन धर्म** से — भगवान महावीर ने इसी दिन पावापुरी में निर्वाण (मोक्ष) प्राप्त किया था। पाँचवीं कथा **सिख धर्म** से — छठे गुरु हरगोबिंद साहिब जी को इसी दिन जहाँगीर की जेल से 52 राजाओं के साथ रिहा किया गया था, इसलिए सिख इसे "बंदी छोड़ दिवस" के रूप में मनाते हैं। **क्षेत्रीय विविधताएँ:** - **उत्तर भारत:** मुख्य रूप से राम-सीता की वापसी और लक्ष्मी-गणेश पूजा। दीयों की पंक्ति, रंगोली, पटाखे, मिठाइयाँ। उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली में विशेष धूमधाम। - **दक्षिण भारत:** तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश में मुख्य उत्सव "नरक चतुर्दशी" (दिवाली से एक दिन पहले) होता है — लोग सुबह तेल स्नान करते हैं जिसे "गंगा स्नान" कहते हैं। कृष्ण की विजय की कथा प्रमुख। - **पूर्व भारत (बंगाल):** दिवाली की रात्रि **काली पूजा** की जाती है — माँ काली की महाशक्ति का आवाहन। विशेष तांत्रिक अनुष्ठान, हिबिस्कस पुष्प, और रक्तवर्ण वस्त्र। - **पश्चिम भारत (गुजरात-महाराष्ट्र):** गुजरात में दिवाली नया वर्ष है — "बेस्तु वरस" (कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा)। व्यापारी **चोपड़ा पूजन** (नए बही-खाते) करते हैं। महाराष्ट्र में "लक्ष्मी पूजन" और फराल (विशेष मिठाइयाँ)। - **डायस्पोरा (विदेश):** नेपाल में "तिहार" के नाम से 5 दिन मनाया जाता है — कुत्ते, कौए, गाय, बैल और भाई की पूजा होती है। मॉरीशस, फिजी, त्रिनिदाद, गुयाना, सूरीनाम — हर जगह भारतीय मूल के लोग दिवाली को राष्ट्रीय अवकाश के रूप में मनाते हैं। अमेरिका के व्हाइट हाउस में भी वार्षिक दिवाली समारोह होता है। **ऐतिहासिक विकास:** दिवाली का सबसे पुराना उल्लेख **स्कंद पुराण** और **पद्म पुराण** में मिलता है। **अर्थशास्त्र (चौथी शताब्दी ईसा पूर्व)** में कौटिल्य ने "दीपोत्सव" के रूप में इसका वर्णन किया है। **अलबरूनी (11वीं सदी)** ने अपने यात्रा वृत्तांत में दिवाली का विस्तृत वर्णन किया। मुग़ल काल में भी अकबर और जहाँगीर की कोर्ट में दिवाली मनाई जाती थी। 1947 में स्वतंत्रता के बाद यह राष्ट्रीय पर्व बना। **ज्योतिषीय आधार:** कार्तिक अमावस्या को चंद्रमा और सूर्य एक ही राशि (तुला/वृश्चिक) में होते हैं — यह वर्ष की सबसे गहन अंधकारमय रात है। इसी कारण शास्त्रों ने इस दिन दीप जलाने का विधान किया — बाहर के अंधकार को भगाने के साथ-साथ मन के अंधकार (अज्ञान) को भी। यह शरद ऋतु का अंत और शीत ऋतु का प्रारंभ है — फसल कटाई पूरी हो चुकी होती है, इसलिए कृषक समाज के लिए यह समृद्धि का उत्सव है। **सांस्कृतिक महत्व:** दिवाली प्रकाश की विजय अंधकार पर, ज्ञान की अज्ञान पर, और शुभ की अशुभ पर विजय का प्रतीक है। यह भारत का सबसे बड़ा "पारिवारिक पर्व" है — परिवार एकत्र होते हैं, बच्चे माता-पिता के पास लौटते हैं, पुरानी दुश्मनियाँ भुलाई जाती हैं। यह भारतीय अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा उत्सव भी है — सोना, वस्त्र, उपहार, मिठाई उद्योग का वार्षिक शिखर। "लक्ष्मी" केवल धन नहीं — समृद्धि, सौभाग्य, और पवित्रता की देवी हैं।

🙏 दिवाली / दीपावली पूजा विधि — कैसे करें?

दिवाली की लक्ष्मी-गणेश पूजा विधिपूर्वक करने से धन, सौभाग्य और गृह शांति प्राप्त होती है। मुख्य पूजा **प्रदोष काल** (सूर्यास्त के बाद लगभग 2 घंटे) में करनी चाहिए जब अमावस्या तिथि स्थिर हो। **पूजन सामग्री (20-25 वस्तुएँ):** - लक्ष्मी-गणेश की नई मूर्ति (मिट्टी या चाँदी की, मुख पश्चिम की ओर) - सरस्वती जी की मूर्ति/चित्र - कुबेर यंत्र, श्री यंत्र - चाँदी का सिक्का (लक्ष्मी जी का) - लाल वस्त्र (पूजा चौकी ढकने के लिए) - कलश, नारियल, आम के पत्ते - रोली, चंदन, कुमकुम, अक्षत (चावल), हल्दी - पुष्प (कमल, गुलाब, गेंदा विशेष), पुष्पमाला - 11 या 21 दीपक (मिट्टी के), घी/सरसों का तेल, रुई की बत्ती - अगरबत्ती, धूप, कपूर - पान के पत्ते, सुपारी, लौंग, इलायची - मिठाई (खीर, लड्डू, पेड़ा), 5 प्रकार के फल - खील-बताशे (दिवाली का विशेष प्रसाद) - जनेऊ (कच्चा सूत), गंगाजल - नए बही-खाते, कलम, स्याही (व्यापारी) - चाँदी/सोने का आभूषण (पूजा में रखने हेतु) - पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, चीनी) **मंत्र (शुद्ध वैदिक):** - गणेश वंदना: "ॐ गं गणपतये नमः" (108 बार) - लक्ष्मी मंत्र: "ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः" (108 बार) - कुबेर मंत्र: "ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धन-धान्याधिपतये धन-धान्य समृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा" - गायत्री मंत्र: "ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्" - श्री सूक्त का पाठ (16 मंत्र) — लक्ष्मी प्राप्ति का सर्वश्रेष्ठ स्तोत्र **पूजा क्रम:** 1. **शुद्धिकरण:** सुबह घर की पूर्ण सफाई, गंगाजल छिड़काव। पूजा स्थान को गाय के गोबर या गंगाजल से पवित्र करें। 2. **चौकी स्थापना:** पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा में लाल वस्त्र पर लक्ष्मी-गणेश-सरस्वती की मूर्ति स्थापित करें। गणेश बाईं ओर, लक्ष्मी मध्य में, सरस्वती दाईं ओर। 3. **कलश स्थापना:** तांबे/चाँदी के कलश में जल, सिक्का, सुपारी, अक्षत भरकर आम के पत्तों के साथ नारियल रखें। 4. **दीप प्रज्वलन:** पूजा से पहले 11 दीप जलाएँ — एक मुख्य घी का दीप पूजा स्थान पर, बाकी घर के कोनों में। 5. **आवाहन:** हाथ जोड़कर गणेश, लक्ष्मी, सरस्वती, कुबेर का आह्वान करें। 6. **षोडशोपचार पूजा:** आसन, पाद्य, अर्घ्य, आचमन, स्नान, वस्त्र, यज्ञोपवीत, गंध, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य, तांबूल, दक्षिणा, नीराजन, प्रदक्षिणा। 7. **लक्ष्मी चालीसा / श्री सूक्त / कनकधारा स्तोत्र** का पाठ। 8. **आरती:** "ॐ जय लक्ष्मी माता" — पूरे परिवार के साथ। 9. **प्रसाद वितरण:** खील-बताशे, मिठाई बाँटें। तिजोरी/लॉकर में लक्ष्मी जी के चरण-चिह्न बनाएँ। **मुहूर्त (सामान्य):** - **प्रदोष काल:** सूर्यास्त के बाद 2 घंटे — सर्वश्रेष्ठ - **वृषभ लग्न:** स्थिर लग्न, लक्ष्मी पूजन का सर्वोत्तम समय - **महानिशीथ काल:** अर्धरात्रि — तांत्रिक पूजा हेतु **सामान्य भूलें:** - पुरानी/खंडित मूर्तियों की पूजा करना - लक्ष्मी पूजा में काले वस्त्र पहनना (वर्जित) - पूजा के दौरान क्रोध/शोर करना - पटाखे जलाने के लिए पूजा जल्दी खत्म कर देना - दीप बुझने देना — पूरी रात जलते रहने चाहिए **बच्चों के लिए सरल रूप:** बच्चे केवल गणेश वंदना बोलें, एक दीप स्वयं जलाएँ, रंगोली बनाने में मदद करें, और आरती में शामिल हों। उनसे 1 पेज की "शुक्रवचन डायरी" लिखवाएँ।

✨ विशेष

दिवाली पाँच दिवसीय महापर्व है — प्रत्येक दिन की अपनी विशेष पूजा, कथा और परंपरा है। **दिन 1 — धनतेरस (कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी):** धन्वंतरि जयंती। समुद्र मंथन से धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे — इसलिए इसे स्वास्थ्य का पर्व भी कहते हैं। इस दिन नए बर्तन, सोना-चाँदी, झाड़ू (लक्ष्मी का प्रतीक) खरीदना शुभ। शाम को यम दीप (यमराज के लिए दक्षिण दिशा में 1 दीप) जलाएँ ताकि अकाल मृत्यु न हो। **दिन 2 — नरक चतुर्दशी / छोटी दिवाली (कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी):** कृष्ण ने नरकासुर का वध किया। दक्षिण भारत में मुख्य दिवाली यही है। सुबह उबटन लगाकर तेल स्नान (अभ्यंग स्नान) करना पुण्यकारी। 14 दीप जलाए जाते हैं। **दिन 3 — मुख्य दिवाली / लक्ष्मी पूजन (कार्तिक अमावस्या):** लक्ष्मी-गणेश-कुबेर पूजा। घर के हर कोने में दीप। पटाखे, रंगोली, मिठाई। **दिन 4 — गोवर्धन पूजा / अन्नकूट (कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा):** कृष्ण ने इंद्र के प्रकोप से गोवर्धन पर्वत उठाकर ब्रज की रक्षा की थी। 56 भोग (छप्पन भोग) अर्पित किए जाते हैं। गुजरात में "बेस्तु वरस" — नया वर्ष। **दिन 5 — भाई दूज / यम द्वितीया (कार्तिक शुक्ल द्वितीया):** बहन भाई के माथे पर तिलक लगाती है, भाई की दीर्घायु की प्रार्थना करती है। यम और यमुना की कथा। **रंगोली के प्रकार:** - **पूकलम** (केरल) — केवल फूलों से - **कोलम** (तमिलनाडु) — सफेद चावल के आटे से ज्यामितीय - **अल्पना** (बंगाल) — सफेद चावल का पेस्ट - **मांडणा** (राजस्थान) — लाल मिट्टी पर सफेद - **चौक** (उत्तर प्रदेश) — रंगीन पाउडर से पारंपरिक चौक-पुरना **दीयों की संख्या का महत्व:** - 1 दीप — सामान्य - 5 दीप — पंच तत्व (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश) - 7 दीप — सप्त ऋषि - 11 दीप — रुद्र - 21 दीप — शुभ संख्या - 51 या 108 — विशेष पूजा हेतु **इको-फ्रेंडली दिवाली:** मिट्टी के दीप (चीनी लाइट्स नहीं), प्राकृतिक रंगों की रंगोली, हरित पटाखे, उपहार में पौधे। ध्वनि प्रदूषण रोकें — पटाखे रात 10 बजे तक। **महत्वपूर्ण:** लक्ष्मी पूजा में दरवाज़ा खुला रखें (लक्ष्मी के आगमन हेतु), तुलसी दल अनिवार्य नहीं है (विष्णु पूजा के विपरीत), और कम से कम एक दीप पूरी रात जलाए रखें।

💪 VV Challenge

**VV Challenge — आंतरिक दीप जलाने का पर्व:** दिवाली बाहर के अंधकार को भगाने का त्योहार है — लेकिन असली दिवाली मन के अंधकार को मिटाना है। इस बार इसे केवल त्योहार नहीं, "आत्म-अनुष्ठान" बनाएँ। **5-दिन चैलेंज (धनतेरस से भाई दूज तक):** - **धनतेरस:** अपनी "आंतरिक धन" की लिस्ट बनाएँ — 10 चीज़ें जिनके लिए आप कृतज्ञ हैं (पैसा नहीं, गुण/रिश्ते/स्वास्थ्य) - **छोटी दिवाली:** एक पुरानी आदत/रिश्ते/डर को "नरकासुर" मानकर मानसिक रूप से उसका त्याग करें — डायरी में लिखें - **बड़ी दिवाली:** 21 दीप जलाएँ और हर दीप के साथ एक संकल्प — "यह दीप मेरे __ के लिए" (क्षमा, साहस, धैर्य, स्वास्थ्य इत्यादि) - **गोवर्धन:** किसी एक व्यक्ति को "56 भोग" दें — पैसा नहीं, 56 मिनट का समय, ध्यान और सुनना - **भाई दूज:** भाई/बहन/मित्र को एक हस्तलिखित पत्र लिखें — WhatsApp नहीं, असली कागज़ **साल भर का संकल्प:** हर अमावस्या को एक दीप जलाकर 5 मिनट मौन रहें। 12 अमावस्याएँ = 12 इंटरनल दिवाली। **याद रखें:** पटाखे 5 मिनट में बुझ जाते हैं। जो दीप आप अपने भीतर जलाते हैं, वो जीवन भर जलता है।

संबंधित पुस्तक

पुस्तक देखें

❓ लोग यह भी पूछते हैं

दिवाली / दीपावली क्या है?

दिवाली, जिसे दीपावली (दीप + आवली = दीपों की पंक्ति) भी कहा जाता है, भारत का सबसे बड़ा और सबसे प्रिय त्योहार है। यह कार्तिक मास की अमावस्या (कृष्ण पक्ष की पंद्रहवीं तिथि) को मनाया जाता है — वर्ष की सबसे अंधेरी रात, जिसे करोड़ों दीपों से प्रकाशमय किया जाता है। दिवाली केवल एक दिन का पर्व नहीं — यह पाँच दिवसीय उत्सव है जो धनतेरस से शुरू होकर भाई दूज तक चलता है। **पौराणिक कथाएँ (एक नहीं, चार-पाँच):** सबसे प्रसिद्ध कथा **रामायण** से है — भगवान राम 14 वर्ष के वनवास और रावण वध के बाद इसी अमावस्या को अ

दिवाली / दीपावली कब है?

दिवाली / दीपावली की तिथि पंचांग गणना के आधार पर तय होती है।

दिवाली / दीपावली क्यों मनाया जाता है?

दिवाली, जिसे दीपावली (दीप + आवली = दीपों की पंक्ति) भी कहा जाता है, भारत का सबसे बड़ा और सबसे प्रिय त्योहार है। यह कार्तिक मास की अमावस्या (कृष्ण पक्ष की पंद्रहवीं तिथि) को मनाया जाता है — वर्ष की सबसे अंधेरी रात, जिसे करोड़ों दीपों से प्रकाशमय किया जाता है। दिवाली केवल एक दिन का पर्व नहीं — यह पाँच दिवसीय उत्सव है जो धनतेरस से शुरू होकर भाई दूज तक चलता है। **पौराणिक कथाएँ (एक नहीं, चार-पाँच):** सबसे प्रसिद्ध कथा **रामायण** से है — भगवान राम 14 वर्ष के वनवास और रावण वध के बाद इसी अमावस्या को अ

दिवाली / दीपावली की पूजा विधि क्या है?

दिवाली की लक्ष्मी-गणेश पूजा विधिपूर्वक करने से धन, सौभाग्य और गृह शांति प्राप्त होती है। मुख्य पूजा **प्रदोष काल** (सूर्यास्त के बाद लगभग 2 घंटे) में करनी चाहिए जब अमावस्या तिथि स्थिर हो। **पूजन सामग्री (20-25 वस्तुएँ):** - लक्ष्मी-गणेश की नई मूर्ति (मिट्टी या चाँदी की, मुख पश्चिम की ओर) - सरस्वती जी की मूर्ति/चित्र - कुबेर यंत्र, श्री यंत्र - चाँदी का सिक्का (लक्ष्मी जी का) - लाल वस्त्र (पूजा चौकी ढकने के लिए) - कलश, नारियल, आम के पत्ते - रोली, चंदन, कुमकुम, अक्षत (चावल), हल्दी - पुष्प (कमल, गुलाब, गेंदा विशेष), पुष्पमाला - 11 या 21 दीपक (मिट्टी के), घी/सरसों का तेल, रुई की बत्ती - अगरबत्ती,

दिवाली / दीपावली पर क्या करें?

घर की सफाई करें, रंगोली बनाएँ, पूजा करें, दान-पुण्य करें, परिवार के साथ समय बिताएँ, प्रसाद बाँटें, और सकारात्मक कार्य करें।

दिवाली / दीपावली पर क्या न करें?

किसी से झगड़ा न करें, मांस-मदिरा का सेवन न करें, नकारात्मक विचारों से बचें, गरीबों का अपमान न करें, और पूजा में शुद्धता का ध्यान रखें।

दिवाली / दीपावली का महत्व क्या है?

दिवाली पाँच दिवसीय महापर्व है — प्रत्येक दिन की अपनी विशेष पूजा, कथा और परंपरा है। **दिन 1 — धनतेरस (कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी):** धन्वंतरि जयंती। समुद्र मंथन से धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे — इसलिए इसे स्वास्थ्य का पर्व भी कहते हैं। इस दिन नए बर्तन, सोना-चाँदी, झाड़ू (लक्ष्मी का प्रतीक) खरीदना शुभ। शाम को यम दीप (यमराज के लिए दक्षिण दिशा में 1 दीप) जलाएँ ताकि अकाल मृत्यु न हो। **दिन 2 — नरक चतुर्दशी / छोटी दिवाली (कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी):** कृष्ण ने नरकासुर का वध किया। दक्षिण भारत में मुख

दिवाली / दीपावली पर क्या खाना बनाएँ?

पारंपरिक सात्विक व्यंजन — खीर, पूरी, हलवा, लड्डू, मिठाई, फल और प्रसाद। मांसाहार और तामसिक भोजन से बचें।

🎊 संबंधित त्योहार

🔮 आज का राशिफल

सभी 12 राशियाँ देखें →

💬 त्योहार से जुड़े विचार

📝 और पढ़ें

VV ब्लॉग — आत्म-विकास के लेख →