गुरु पूर्णिमा
Guru Purnima
गुरु पूर्णिमा कब है?
तिथि गणना हो रही है...
📖 गुरु पूर्णिमा के बारे में
गुरु पूर्णिमा आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा को मनाई जाती है। यह दिन गुरु — शिक्षक, मार्गदर्शक — के सम्मान में है। महर्षि व्यास का जन्मदिन होने के कारण इसे व्यास पूर्णिमा भी कहते हैं। भारतीय संस्कृति में गुरु को ब्रह्मा, विष्णु और महेश से भी ऊपर माना गया है।
🙏 गुरु पूर्णिमा पूजा विधि — कैसे करें?
अपने गुरु/शिक्षक से मिलें या उन्हें फोन करें। गुरु के चरण स्पर्श करें। गुरु को दक्षिणा अर्पित करें। ध्यान और स्वाध्याय करें।
✨ विशेष
बौद्ध धर्म में भी गुरु पूर्णिमा महत्वपूर्ण है — इसी दिन बुद्ध ने सारनाथ में पहला उपदेश दिया था।
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गुरु पूर्णिमा पर उस शिक्षक को धन्यवाद कहें जिसने आपकी ज़िंदगी बदली। एक message, एक call, या एक मुलाकात — गुरु के लिए इससे बड़ी दक्षिणा कोई नहीं।
❓ लोग यह भी पूछते हैं
गुरु पूर्णिमा क्या है?
गुरु पूर्णिमा आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा को मनाई जाती है। यह दिन गुरु — शिक्षक, मार्गदर्शक — के सम्मान में है। महर्षि व्यास का जन्मदिन होने के कारण इसे व्यास पूर्णिमा भी कहते हैं। भारतीय संस्कृति में गुरु को ब्रह्मा, विष्णु और महेश से भी ऊपर माना गया है।
गुरु पूर्णिमा कब है?
गुरु पूर्णिमा की तिथि पंचांग गणना के आधार पर तय होती है।
गुरु पूर्णिमा क्यों मनाया जाता है?
गुरु पूर्णिमा आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा को मनाई जाती है। यह दिन गुरु — शिक्षक, मार्गदर्शक — के सम्मान में है। महर्षि व्यास का जन्मदिन होने के कारण इसे व्यास पूर्णिमा भी कहते हैं। भारतीय संस्कृति में गुरु को ब्रह्मा, विष्णु और महेश से भी ऊपर माना गया है।
गुरु पूर्णिमा की पूजा विधि क्या है?
अपने गुरु/शिक्षक से मिलें या उन्हें फोन करें। गुरु के चरण स्पर्श करें। गुरु को दक्षिणा अर्पित करें। ध्यान और स्वाध्याय करें।
गुरु पूर्णिमा पर क्या करें?
घर की सफाई करें, रंगोली बनाएँ, पूजा करें, दान-पुण्य करें, परिवार के साथ समय बिताएँ, प्रसाद बाँटें, और सकारात्मक कार्य करें।
गुरु पूर्णिमा पर क्या न करें?
किसी से झगड़ा न करें, मांस-मदिरा का सेवन न करें, नकारात्मक विचारों से बचें, गरीबों का अपमान न करें, और पूजा में शुद्धता का ध्यान रखें।
गुरु पूर्णिमा का महत्व क्या है?
बौद्ध धर्म में भी गुरु पूर्णिमा महत्वपूर्ण है — इसी दिन बुद्ध ने सारनाथ में पहला उपदेश दिया था।
गुरु पूर्णिमा पर क्या खाना बनाएँ?
पारंपरिक सात्विक व्यंजन — खीर, पूरी, हलवा, लड्डू, मिठाई, फल और प्रसाद। मांसाहार और तामसिक भोजन से बचें।