छोटे में कहानी
- मोहन और सोहन जंगल घूमने गए, तभी झाड़ियों से एक बड़ा भालू निकला।
- मोहन अकेला पेड़ पर चढ़ गया; सोहन को चढ़ना नहीं आता था, तो वह चुपचाप झाड़ी के पीछे छिप गया, और भालू आगे चला गया।
- मोहन ने माफ़ी माँगी, और दोनों ने तय किया कि मुश्किल में एक-दूसरे का हाथ कभी नहीं छोड़ेंगे।
पूरी कहानी
बहुत समय पहले की बात है। एक हरा-भरा जंगल था। उस जंगल में बड़े-बड़े पेड़ थे। पेड़ों के बीच एक छोटी सी पगडंडी थी। पगडंडी के किनारे नन्हे फूल खिलते थे।
उस जंगल के पास एक छोटा सा गाँव था। गाँव में दो प्यारे मित्र रहते थे। एक का नाम मोहन था। दूसरे का नाम सोहन था। दोनों बचपन से साथ खेलते थे। दोनों साथ खाते थे। दोनों साथ हँसते थे।
एक दिन मोहन और सोहन ने सोचा, चलो जंगल घूमने चलते हैं। उन्होंने अपनी छोटी सी पोटली बाँधी। पोटली में रोटी और गुड़ रखा। फिर हँसते-हँसते पगडंडी पर चल पड़े।
जंगल में बहुत शांति थी। पक्षी धीरे-धीरे गा रहे थे। तितलियाँ फूलों पर उड़ रही थीं। हवा पत्तों से बातें कर रही थी। दोनों मित्र बहुत खुश थे।
चलते-चलते वे एक बड़े पेड़ के पास पहुँचे। तभी पास की झाड़ियों से एक आवाज़ आई। मोहन और सोहन ने देखा। एक बड़ा सा भूरा भालू धीरे-धीरे बाहर आ रहा था।
भालू गुस्से में नहीं था। वह बस शहद ढूँढ रहा था। पर वह बहुत बड़ा था। उसके पास आते ही मोहन घबरा गया।
मोहन फुर्ती से पेड़ पर चढ़ गया। उसने सोहन की तरफ देखा भी नहीं। सोहन को पेड़ पर चढ़ना नहीं आता था। वह नीचे अकेला रह गया।
सोहन ने सोचा, मुझे क्या करना चाहिए। उसने एक पल आँखें बंद कीं। फिर वह धीरे से पास की एक बड़ी झाड़ी के पीछे छिप गया। वह बहुत चुपचाप बैठ गया। उसने अपनी साँस धीमी कर ली। वह पत्ते की तरह शांत हो गया।
भालू पास आया। उसने इधर-उधर देखा। उसने हवा सूँघी। सोहन बिल्कुल नहीं हिला। भालू को लगा, यहाँ तो बस झाड़ियाँ हैं। भालू मुस्कुराया, कंधे हिलाए, और धीरे-धीरे आगे चला गया। वह दूर जंगल में शहद ढूँढने निकल गया।
थोड़ी देर बाद मोहन पेड़ से नीचे उतरा। उसने सोहन को झाड़ी के पीछे से निकलते देखा। मोहन को बहुत शर्म आई। उसने सोहन का हाथ पकड़ा और कहा, मित्र, मुझे माफ़ कर दो। मैं अकेला पेड़ पर चढ़ गया। तुम्हें नीचे छोड़ दिया। यह ठीक नहीं था।
सोहन ने हल्के से मुस्कुराकर कहा, कोई बात नहीं मोहन। डर सबको लगता है। पर सच्चा मित्र वही है जो मुश्किल में साथ दे। चलो, आज से हम एक-दूसरे का हाथ कभी नहीं छोड़ेंगे।
मोहन ने गले लगाकर कहा, हाँ मित्र। अब हम हमेशा साथ रहेंगे।
दोनों हाथ पकड़कर गाँव की तरफ लौटने लगे। शाम का सूरज पेड़ों के पीछे छिप रहा था। आसमान गुलाबी और सुनहरा हो गया था। पक्षी अपने घोंसलों की तरफ उड़ रहे थे।
घर पहुँचकर दोनों मित्रों ने माँ के हाथ का गरम खाना खाया। फिर अपने-अपने नरम बिस्तर पर लेट गए। खिड़की से चाँद झाँक रहा था। तारे धीरे-धीरे टिमटिमा रहे थे।
क्या तुमने देखा, प्यारे बच्चे, सच्चा मित्र वही होता है जो मुश्किल में साथ खड़ा रहे। और सभी खुशी-खुशी सो गए। शुभ रात्रि, प्यारे बच्चे। मीठे सपने।
कहानी की सीख
सच्चा मित्र वही है जो मुश्किल में साथ दे। ग़लती हो जाए तो माफ़ी माँगना भी दोस्ती का हिस्सा है।
कहानी के बाद बच्चे से पूछिए
- भालू को देखकर मोहन ने क्या किया, और सोहन ने क्या किया?
- मोहन को बाद में शर्म क्यों आई?
- अगर तुम्हारा दोस्त डर जाए, तो तुम उसकी मदद कैसे करोगे?
सही-ग़लत जवाब नहीं ढूँढने हैं; बच्चा अपने शब्दों में बताए, बस इतना।
यही कहानी आवाज़ में
VV ऐप में यह कहानी धीमी, शांत आवाज़ में है (3 मिनट 22 सेकंड), सोने से पहले सुनाने के लिए। सुनना मुफ़्त है; पहली बार लगभग 30 सेकंड का मुफ़्त sign-up करना होता है।
ऐप में सुनिए →मूल कहानी से फ़र्क
ईसप की मूल कथा में दूसरा मित्र साँस रोककर ज़मीन पर लेट जाता है, भालू उसे सूँघकर चला जाता है, और बाद में वह कहता है कि भालू ने कान में कहा: "ऐसे मित्र पर भरोसा मत करना जो मुश्किल में छोड़ दे।" हमारे सोने से पहले वाले संस्करण में सोहन झाड़ी के पीछे छिपता है, और कहानी माफ़ी और दोस्ती पर ख़त्म होती है। सीख वही है: सच्चा मित्र मुश्किल में साथ देता है।
VV Bachpan · माँ-पापा के लिए
कहानी के बाद, आगे क्या?
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दो मित्र और भालू की कहानी से क्या सीख मिलती है?
सच्चा मित्र वही है जो मुश्किल में साथ दे। ग़लती हो जाए तो माफ़ी माँगना भी दोस्ती का हिस्सा है।
दो मित्र और भालू की कहानी छोटे में (short में) कैसे सुनाएँ?
मोहन और सोहन जंगल घूमने गए, तभी झाड़ियों से एक बड़ा भालू निकला। मोहन अकेला पेड़ पर चढ़ गया; सोहन को चढ़ना नहीं आता था, तो वह चुपचाप झाड़ी के पीछे छिप गया, और भालू आगे चला गया। मोहन ने माफ़ी माँगी, और दोनों ने तय किया कि मुश्किल में एक-दूसरे का हाथ कभी नहीं छोड़ेंगे।
यह कहानी किस उम्र के बच्चों के लिए है?
3 से 8 साल के बच्चों के लिए। भाषा आसान है और अंत शांत, ताकि सोने से पहले सुनाई जा सके। 8 साल से बड़े बच्चे इसे ख़ुद पढ़ सकते हैं।
क्या यह कहानी आवाज़ में सुन सकते हैं?
हाँ। यही कहानी VV ऐप में धीमी, सोने से पहले वाली आवाज़ में है (3 मिनट 22 सेकंड)। सुनना मुफ़्त है; पहली बार लगभग 30 सेकंड का मुफ़्त sign-up करना होता है।
क्या यह मूल कहानी जैसी ही है?
ईसप की मूल कथा में दूसरा मित्र साँस रोककर ज़मीन पर लेट जाता है, भालू उसे सूँघकर चला जाता है, और बाद में वह कहता है कि भालू ने कान में कहा: "ऐसे मित्र पर भरोसा मत करना जो मुश्किल में छोड़ दे।" हमारे सोने से पहले वाले संस्करण में सोहन झाड़ी के पीछे छिपता है, और कहानी माफ़ी और दोस्ती पर ख़त्म होती है। सीख वही है: सच्चा मित्र मुश्किल में साथ देता है।