पूर्णिमा / अमावस्या तिथि का महत्व
पूर्णिमा (शुक्ल 15) और अमावस्या (कृष्ण 15) दोनों ही चंद्र मास की चरम तिथियाँ हैं — पूर्णिमा पर चंद्रमा पूर्ण रूप में दिखाई देता है और अमावस्या पर बिल्कुल अदृश्य रहता है। पूर्णिमा को 'पूर्णा तिथि' में गिना जाता है और यह मन की पूर्णता, समृद्धि, सौभाग्य की प्रतीक है। शरद पूर्णिमा (आश्विन शुक्ल 15) पर चंद्रमा से अमृत वर्षा मानी जाती है। गुरु पूर्णिमा (आषाढ़ शुक्ल 15) पर गुरु पूजन होता है। कार्तिक पूर्णिमा को 'देव दिवाली' मनाई जाती है। अमावस्या पितरों की तिथि है — पितृ तर्पण, श्राद्ध कर्म, दीप दान इसी दिन विशेष फलदायी हैं। कार्तिक अमावस्या पर दिवाली, महा लक्ष्मी पूजन होता है। मौनी अमावस्या (माघ) पर मौन व्रत और गंगा स्नान विशेष शुभ है। पूर्णिमा पर नए संकल्प लेने और अमावस्या पर मन व जीवन की शुद्धि के लिए ध्यान करना उत्तम है।
स्वामी देवता
चंद्रमा (पूर्णिमा) / पितृ देव (अमावस्या)
तत्व
जल तत्व
क्रमांक
15
पक्ष
शुक्ल व कृष्ण
शुभ कार्य (क्या करें)
- ✓पूर्णिमा — सत्यनारायण कथा, लक्ष्मी पूजा
- ✓अमावस्या — पितृ तर्पण, श्राद्ध
- ✓दिवाली — लक्ष्मी पूजन
- ✓गंगा स्नान
- ✓दान, दीप दान
अशुभ कार्य (क्या न करें)
- ✗अमावस्या पर नए व्यवसाय शुभारंभ
- ✗अमावस्या पर विवाह
- ✗क्रोध व नकारात्मक विचार
उपाय व मंत्र
उपाय
- •पूर्णिमा पर चंद्र को दूध का अर्घ्य
- •अमावस्या पर पितरों के नाम दीप व अन्न दान
- •सत्यनारायण कथा सुनें
मंत्र
ॐ चंद्रमसे नमः
ॐ पितृभ्यो नमः
ॐ महालक्ष्म्यै नमः
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पूर्णिमा / अमावस्या तिथि — अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (People also ask)
पूर्णिमा / अमावस्या तिथि क्या है?
पूर्णिमा / अमावस्या (Purnima / Amavasya) हिंदू पंचांग की 15वीं तिथि है, जो चंद्रमा (पूर्णिमा) / पितृ देव (अमावस्या) को समर्पित है। यह जल तत्व से जुड़ी है और चंद्र मास के दोनों पक्षों (शुक्ल व कृष्ण) में आती है।
पूर्णिमा / अमावस्या तिथि के दिन क्या करना चाहिए?
पूर्णिमा / अमावस्या तिथि पर पूर्णिमा — सत्यनारायण कथा, लक्ष्मी पूजा, अमावस्या — पितृ तर्पण, श्राद्ध, दिवाली — लक्ष्मी पूजन जैसे कार्य विशेष शुभ माने गए हैं। चंद्रमा (पूर्णिमा) / पितृ देव (अमावस्या) का स्मरण व पूजन फलदायी होता है।
पूर्णिमा / अमावस्या तिथि पर कौन से कार्य नहीं करने चाहिए?
पूर्णिमा / अमावस्या तिथि पर अमावस्या पर नए व्यवसाय शुभारंभ, अमावस्या पर विवाह, क्रोध व नकारात्मक विचार जैसे कार्यों से बचना चाहिए। अन्य पंचांग तत्वों (नक्षत्र, योग, वार) का विचार अवश्य करें।
पूर्णिमा / अमावस्या तिथि का स्वामी कौन है?
पूर्णिमा / अमावस्या तिथि के स्वामी चंद्रमा (पूर्णिमा) / पितृ देव (अमावस्या) हैं। इस दिन इनकी पूजा व मंत्र जप विशेष फलदायी माना गया है।
Purnima / Amavasya tithi kab hai 2026?
Purnima / Amavasya tithi har mahine aati hai — shukla aur krishna paksha mein. Upcoming Purnima / Amavasya tithi dates is page par niche di gayi hain, including Hindu month aur paksha info.
पूर्णिमा / अमावस्या तिथि पर कौन से मंत्र का जाप करें?
पूर्णिमा / अमावस्या तिथि पर "ॐ चंद्रमसे नमः", "ॐ पितृभ्यो नमः", "ॐ महालक्ष्म्यै नमः" मंत्रों का जाप श्रेष्ठ है। इस दिन चंद्रमा (पूर्णिमा) / पितृ देव (अमावस्या) की पूजा करके मनोकामना सिद्ध की जा सकती है।
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