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Nakshatra · 27 Lunar Mansions

ज्येष्ठा नक्षत्र (Jyeshtha)

देवता इंद्र · स्वामी ग्रह बुध · नक्षत्र क्रमांक 18

देवता

इंद्र

स्वामी ग्रह

बुध / Mercury

तत्व

वायु

गुण

सत्व

नाड़ी

आदि

शरीर का अंग

गर्दन व जीभ

प्रतीक

छाता / कर्णफूल

तारा संख्या

3

ज्येष्ठा नक्षत्र — स्वभाव व व्यक्तित्व

ज्येष्ठा नक्षत्र 'बड़े' या 'श्रेष्ठ' का प्रतीक है। इंद्र देव — देवताओं के राजा — इसके स्वामी हैं। बुध ग्रह के प्रभाव से इन जातकों में तीक्ष्ण बुद्धि, वाणी कौशल व नेतृत्व क्षमता होती है। ये जिम्मेदारियों को स्वीकार करने और कठिन परिस्थितियों में नेतृत्व देने में आगे रहते हैं। परिवार में बड़े भाई-बहन या संरक्षक की भूमिका निभाते हैं। कभी-कभी अत्यधिक रहस्य रखने या अकेले रहने की प्रवृत्ति होती है। गहन मानसिकता, रणनीति व संघर्ष-क्षमता इनकी ताकत है।

करियर व उपयुक्त क्षेत्र

प्रशासन, राजनीति, सैन्य, खुफिया सेवाएँ, कानून, कॉर्पोरेट नेतृत्व, मनोविश्लेषण।

4 पद (चरण)

पद 1
वृश्चिक 16°40'-20°
पद 2
वृश्चिक 20°-23°20'
पद 3
वृश्चिक 23°20'-26°40'
पद 4
वृश्चिक 26°40'-30°

चुनौतीपूर्ण नक्षत्र

मंत्र

ॐ इंद्राय नमः

ॐ बुं बुधाय नमः

अनुकूल राशि — वृश्चिक

ज्येष्ठा नक्षत्र मुख्यतः वृश्चिक राशि में पड़ता है

वृश्चिक राशिफल →

ज्येष्ठा नक्षत्र — अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (People also ask)

ज्येष्ठा नक्षत्र क्या है?

ज्येष्ठा (Jyeshtha) 27 नक्षत्रों में 18वाँ नक्षत्र है। इसके देवता इंद्र और स्वामी ग्रह बुध (Mercury) हैं। यह वायु तत्व व सत्व गुण से जुड़ा है।

ज्येष्ठा नक्षत्र वाले लोग कैसे होते हैं?

ज्येष्ठा नक्षत्र में जन्मे जातक ज्येष्ठा नक्षत्र 'बड़े' या 'श्रेष्ठ' का प्रतीक है। इंद्र देव — देवताओं के राजा — इसके स्वामी हैं। बुध ग्रह के प्रभाव से इन जातकों में तीक्ष्ण बुद्धि, वाणी कौशल व नेतृत्व क्षमता होत...

Jyeshtha nakshatra के लिए कौन सा करियर सही है?

ज्येष्ठा नक्षत्र के जातकों के लिए उपयुक्त करियर: प्रशासन, राजनीति, सैन्य, खुफिया सेवाएँ, कानून, कॉर्पोरेट नेतृत्व, मनोविश्लेषण।

ज्येष्ठा नक्षत्र किस राशि में आता है?

ज्येष्ठा नक्षत्र मुख्य रूप से वृश्चिक राशि में आता है। प्रत्येक नक्षत्र 4 पदों (चरण) में बँटा होता है — विस्तृत पद जानकारी ऊपर दी गई है।

ज्येष्ठा नक्षत्र का मंत्र क्या है?

ज्येष्ठा नक्षत्र के जातक "ॐ इंद्राय नमः", "ॐ बुं बुधाय नमः" मंत्रों का जाप करें। अपने नक्षत्र के देवता (इंद्र) व स्वामी ग्रह (बुध) की पूजा जीवन में शुभ परिणाम लाती है।

ज्येष्ठा नक्षत्र के अनुकूल व प्रतिकूल नक्षत्र कौन से हैं?

ज्येष्ठा नक्षत्र के अनुकूल: मूल, पूर्वाषाढ़ा, रेवती, अश्विनी। चुनौतीपूर्ण: मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु।

प्रेरणादायक विचार

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