देवता
बृहस्पति
स्वामी ग्रह
शनि / Saturn
तत्व
जल
गुण
तमस
नाड़ी
आदि
शरीर का अंग
मुख व मुख के ऊपरी भाग
प्रतीक
कमल / गाय का थन
तारा संख्या
3
पुष्य नक्षत्र — स्वभाव व व्यक्तित्व
पुष्य नक्षत्र को 'नक्षत्रों का राजा' कहा जाता है — यह सर्वाधिक शुभ नक्षत्र माना गया है। पोषण, समृद्धि व कल्याण इसका मूल भाव है। इस नक्षत्र में जन्मे जातक परोपकारी, विश्वसनीय और स्थिर स्वभाव के होते हैं। बृहस्पति देवता व शनि ग्रह — दोनों के प्रभाव से जीवन में गंभीरता, ज्ञान और धैर्य का मिश्रण मिलता है। परिवार व समाज के प्रति कर्तव्यनिष्ठ होते हैं। आध्यात्मिक झुकाव प्रबल है। कभी-कभी अति-सुरक्षात्मक होने से अवसर चूक जाते हैं। पुष्य नक्षत्र पर सोना खरीदना अत्यंत शुभ माना गया है।
करियर व उपयुक्त क्षेत्र
शिक्षण, चिकित्सा, परामर्श, वित्त, सरकारी सेवा, कृषि, धार्मिक कार्य, सामाजिक सेवा।
4 पद (चरण)
मंत्र
ॐ बृं बृहस्पतये नमः
ॐ शं शनैश्चराय नमः
अनुकूल राशि — कर्क
पुष्य नक्षत्र मुख्यतः कर्क राशि में पड़ता है
पुष्य नक्षत्र — अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (People also ask)
पुष्य नक्षत्र क्या है?
पुष्य (Pushya) 27 नक्षत्रों में 8वाँ नक्षत्र है। इसके देवता बृहस्पति और स्वामी ग्रह शनि (Saturn) हैं। यह जल तत्व व तमस गुण से जुड़ा है।
पुष्य नक्षत्र वाले लोग कैसे होते हैं?
पुष्य नक्षत्र में जन्मे जातक पुष्य नक्षत्र को 'नक्षत्रों का राजा' कहा जाता है — यह सर्वाधिक शुभ नक्षत्र माना गया है। पोषण, समृद्धि व कल्याण इसका मूल भाव है। इस नक्षत्र में जन्मे जातक परोपकारी, विश्वसनीय और स्थ...
Pushya nakshatra के लिए कौन सा करियर सही है?
पुष्य नक्षत्र के जातकों के लिए उपयुक्त करियर: शिक्षण, चिकित्सा, परामर्श, वित्त, सरकारी सेवा, कृषि, धार्मिक कार्य, सामाजिक सेवा।
पुष्य नक्षत्र किस राशि में आता है?
पुष्य नक्षत्र मुख्य रूप से कर्क राशि में आता है। प्रत्येक नक्षत्र 4 पदों (चरण) में बँटा होता है — विस्तृत पद जानकारी ऊपर दी गई है।
पुष्य नक्षत्र का मंत्र क्या है?
पुष्य नक्षत्र के जातक "ॐ बृं बृहस्पतये नमः", "ॐ शं शनैश्चराय नमः" मंत्रों का जाप करें। अपने नक्षत्र के देवता (बृहस्पति) व स्वामी ग्रह (शनि) की पूजा जीवन में शुभ परिणाम लाती है।
पुष्य नक्षत्र के अनुकूल व प्रतिकूल नक्षत्र कौन से हैं?
पुष्य नक्षत्र के अनुकूल: आश्लेषा, मघा, अनुराधा, ज्येष्ठा। चुनौतीपूर्ण: श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा।
प्रेरणादायक विचार
हिंदी में पढ़ें →
आज का पंचांग
तिथि, नक्षत्र, योग, करण →