देवता
अदिति
स्वामी ग्रह
बृहस्पति / Jupiter
तत्व
जल
गुण
सत्व
नाड़ी
आदि
शरीर का अंग
उंगलियाँ व नाक
प्रतीक
धनुष व तरकश
तारा संख्या
4
पुनर्वसु नक्षत्र — स्वभाव व व्यक्तित्व
पुनर्वसु का शाब्दिक अर्थ है 'पुनः प्रकाश' — पुनर्जन्म, पुनरारंभ और आशा का प्रतीक। बृहस्पति का स्वामित्व इन्हें ज्ञान, धर्म व दर्शन की ओर झुकाव देता है। ये शिक्षक, मार्गदर्शक व दार्शनिक प्रवृत्ति के होते हैं। अदिति (माँ) देवता होने से इनमें मातृत्व की भावना, देखभाल का गुण और करुणा प्रबल है। सरलता, सत्यनिष्ठा, और आत्मविश्वास इनकी पहचान है। कभी-कभी अतिरंजना व आदर्शवाद वास्तविकता से टकराता है। यात्रा, तीर्थाटन व ज्ञान की खोज इन्हें आनंद देती है।
करियर व उपयुक्त क्षेत्र
शिक्षण, परामर्श, दर्शन, धर्म, लेखन, प्रकाशन, यात्रा, वित्त, आध्यात्मिक मार्गदर्शन।
4 पद (चरण)
चुनौतीपूर्ण नक्षत्र
मंत्र
ॐ अदित्यै नमः
ॐ बृं बृहस्पतये नमः
अनुकूल राशि — मिथुन
पुनर्वसु नक्षत्र मुख्यतः मिथुन राशि में पड़ता है
पुनर्वसु नक्षत्र — अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (People also ask)
पुनर्वसु नक्षत्र क्या है?
पुनर्वसु (Punarvasu) 27 नक्षत्रों में 7वाँ नक्षत्र है। इसके देवता अदिति और स्वामी ग्रह बृहस्पति (Jupiter) हैं। यह जल तत्व व सत्व गुण से जुड़ा है।
पुनर्वसु नक्षत्र वाले लोग कैसे होते हैं?
पुनर्वसु नक्षत्र में जन्मे जातक पुनर्वसु का शाब्दिक अर्थ है 'पुनः प्रकाश' — पुनर्जन्म, पुनरारंभ और आशा का प्रतीक। बृहस्पति का स्वामित्व इन्हें ज्ञान, धर्म व दर्शन की ओर झुकाव देता है। ये शिक्षक, मार्गदर्शक व दार्...
Punarvasu nakshatra के लिए कौन सा करियर सही है?
पुनर्वसु नक्षत्र के जातकों के लिए उपयुक्त करियर: शिक्षण, परामर्श, दर्शन, धर्म, लेखन, प्रकाशन, यात्रा, वित्त, आध्यात्मिक मार्गदर्शन।
पुनर्वसु नक्षत्र किस राशि में आता है?
पुनर्वसु नक्षत्र मुख्य रूप से मिथुन राशि में आता है। प्रत्येक नक्षत्र 4 पदों (चरण) में बँटा होता है — विस्तृत पद जानकारी ऊपर दी गई है।
पुनर्वसु नक्षत्र का मंत्र क्या है?
पुनर्वसु नक्षत्र के जातक "ॐ अदित्यै नमः", "ॐ बृं बृहस्पतये नमः" मंत्रों का जाप करें। अपने नक्षत्र के देवता (अदिति) व स्वामी ग्रह (बृहस्पति) की पूजा जीवन में शुभ परिणाम लाती है।
पुनर्वसु नक्षत्र के अनुकूल व प्रतिकूल नक्षत्र कौन से हैं?
पुनर्वसु नक्षत्र के अनुकूल: पुष्य, आश्लेषा, विशाखा, अनुराधा। चुनौतीपूर्ण: पूर्वाषाढ़ा, श्रवण, धनिष्ठा।
प्रेरणादायक विचार
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