Skip to main content

Free Shipping on all Prepaid Orders! Abhi Order Karo 🚚

Nakshatra · 27 Lunar Mansions

मूल नक्षत्र (Mula)

देवता निऋति · स्वामी ग्रह केतु · नक्षत्र क्रमांक 19

देवता

निऋति

स्वामी ग्रह

केतु / Ketu

तत्व

वायु

गुण

तमस

नाड़ी

आदि

शरीर का अंग

पैर व तलवे

प्रतीक

जड़ों का गुच्छा

तारा संख्या

11

मूल नक्षत्र — स्वभाव व व्यक्तित्व

मूल नक्षत्र का अर्थ है 'जड़' — मूल कारण की खोज। निऋति देवी व केतु के प्रभाव से इस नक्षत्र के जातक गहन शोधकर्ता, दार्शनिक व आध्यात्मिक खोजी होते हैं। किसी भी विषय की गहराई तक पहुँचने तक ये रुकते नहीं। मानसिक तीक्ष्णता, विश्लेषण व खोजी प्रवृत्ति प्रबल है। कभी-कभी असंतुष्टि व परिवर्तनशीलता जीवन में उथल-पुथल लाती है। आरंभिक जीवन में संघर्ष संभव, किंतु अंततः आध्यात्मिक उन्नति। परंपरागत रूप से मूल नक्षत्र को थोड़ा तीव्र माना जाता है — शांति पूजा करवाई जाती है।

करियर व उपयुक्त क्षेत्र

शोध, दर्शन, आध्यात्मिक कार्य, औषधि, मनोविज्ञान, तांत्रिक विज्ञान, लेखन, पुरातत्व।

4 पद (चरण)

पद 1
धनु 0°-3°20'
पद 2
धनु 3°20'-6°40'
पद 3
धनु 6°40'-10°
पद 4
धनु 10°-13°20'

चुनौतीपूर्ण नक्षत्र

मंत्र

ॐ निऋतये नमः

ॐ केतवे नमः

अनुकूल राशि — धनु

मूल नक्षत्र मुख्यतः धनु राशि में पड़ता है

धनु राशिफल →

मूल नक्षत्र — अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (People also ask)

मूल नक्षत्र क्या है?

मूल (Mula) 27 नक्षत्रों में 19वाँ नक्षत्र है। इसके देवता निऋति और स्वामी ग्रह केतु (Ketu) हैं। यह वायु तत्व व तमस गुण से जुड़ा है।

मूल नक्षत्र वाले लोग कैसे होते हैं?

मूल नक्षत्र में जन्मे जातक मूल नक्षत्र का अर्थ है 'जड़' — मूल कारण की खोज। निऋति देवी व केतु के प्रभाव से इस नक्षत्र के जातक गहन शोधकर्ता, दार्शनिक व आध्यात्मिक खोजी होते हैं। किसी भी विषय की गहराई तक पहुँचन...

Mula nakshatra के लिए कौन सा करियर सही है?

मूल नक्षत्र के जातकों के लिए उपयुक्त करियर: शोध, दर्शन, आध्यात्मिक कार्य, औषधि, मनोविज्ञान, तांत्रिक विज्ञान, लेखन, पुरातत्व।

मूल नक्षत्र किस राशि में आता है?

मूल नक्षत्र मुख्य रूप से धनु राशि में आता है। प्रत्येक नक्षत्र 4 पदों (चरण) में बँटा होता है — विस्तृत पद जानकारी ऊपर दी गई है।

मूल नक्षत्र का मंत्र क्या है?

मूल नक्षत्र के जातक "ॐ निऋतये नमः", "ॐ केतवे नमः" मंत्रों का जाप करें। अपने नक्षत्र के देवता (निऋति) व स्वामी ग्रह (केतु) की पूजा जीवन में शुभ परिणाम लाती है।

मूल नक्षत्र के अनुकूल व प्रतिकूल नक्षत्र कौन से हैं?

मूल नक्षत्र के अनुकूल: पूर्वाषाढ़ा, उत्तराषाढ़ा, अश्विनी, भरणी। चुनौतीपूर्ण: आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य।

प्रेरणादायक विचार

हिंदी में पढ़ें →

आज का पंचांग

तिथि, नक्षत्र, योग, करण →

अन्य नक्षत्र