देवता
विश्वेदेव
स्वामी ग्रह
सूर्य / Sun
तत्व
वायु
गुण
सत्व
नाड़ी
मध्य
शरीर का अंग
कमर व जांघ
प्रतीक
हाथी दांत / पंखे का पिछला भाग
तारा संख्या
2
उत्तराषाढ़ा नक्षत्र — स्वभाव व व्यक्तित्व
उत्तराषाढ़ा 'अंतिम व स्थायी विजय' का नक्षत्र है। विश्वेदेवता व सूर्य का स्वामित्व इन जातकों को धैर्यवान, उच्च नैतिकता वाला व दीर्घकालीन सफलता पाने वाला बनाता है। ये परिश्रमी, जिम्मेदार व न्यायप्रिय होते हैं। नेतृत्व क्षमता के साथ-साथ विनम्रता व टीम भावना भी है। स्थायी संस्थान निर्माण, सरकारी सेवा, व बड़ी परियोजनाओं में सफलता। कभी-कभी अत्यधिक गंभीरता व तनाव परेशान करते हैं। परिवार व समाज के प्रति समर्पित।
करियर व उपयुक्त क्षेत्र
प्रशासन, सरकारी सेवा, कॉर्पोरेट प्रबंधन, कानून, शिक्षण, न्यायपालिका, सामाजिक कार्य।
4 पद (चरण)
मंत्र
ॐ विश्वेदेवेभ्यो नमः
ॐ सूर्याय नमः
अनुकूल राशि — धनु
उत्तराषाढ़ा नक्षत्र मुख्यतः धनु राशि में पड़ता है
उत्तराषाढ़ा नक्षत्र — अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (People also ask)
उत्तराषाढ़ा नक्षत्र क्या है?
उत्तराषाढ़ा (Uttara Ashadha) 27 नक्षत्रों में 21वाँ नक्षत्र है। इसके देवता विश्वेदेव और स्वामी ग्रह सूर्य (Sun) हैं। यह वायु तत्व व सत्व गुण से जुड़ा है।
उत्तराषाढ़ा नक्षत्र वाले लोग कैसे होते हैं?
उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में जन्मे जातक उत्तराषाढ़ा 'अंतिम व स्थायी विजय' का नक्षत्र है। विश्वेदेवता व सूर्य का स्वामित्व इन जातकों को धैर्यवान, उच्च नैतिकता वाला व दीर्घकालीन सफलता पाने वाला बनाता है। ये परिश्रमी, जिम्म...
Uttara Ashadha nakshatra के लिए कौन सा करियर सही है?
उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के जातकों के लिए उपयुक्त करियर: प्रशासन, सरकारी सेवा, कॉर्पोरेट प्रबंधन, कानून, शिक्षण, न्यायपालिका, सामाजिक कार्य।
उत्तराषाढ़ा नक्षत्र किस राशि में आता है?
उत्तराषाढ़ा नक्षत्र मुख्य रूप से धनु राशि में आता है। प्रत्येक नक्षत्र 4 पदों (चरण) में बँटा होता है — विस्तृत पद जानकारी ऊपर दी गई है।
उत्तराषाढ़ा नक्षत्र का मंत्र क्या है?
उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के जातक "ॐ विश्वेदेवेभ्यो नमः", "ॐ सूर्याय नमः" मंत्रों का जाप करें। अपने नक्षत्र के देवता (विश्वेदेव) व स्वामी ग्रह (सूर्य) की पूजा जीवन में शुभ परिणाम लाती है।
उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के अनुकूल व प्रतिकूल नक्षत्र कौन से हैं?
उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के अनुकूल: श्रवण, धनिष्ठा, कृत्तिका, रोहिणी। चुनौतीपूर्ण: पुष्य, आश्लेषा, मघा।
प्रेरणादायक विचार
हिंदी में पढ़ें →
आज का पंचांग
तिथि, नक्षत्र, योग, करण →